kanch si ek ladki – 3
“चंद दिन पहले चाँद निकला, कुछ बदला- बदला सा ‘ब्लड मून’ शायद चाँद को भी हो गया है इश्क तभी […]
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“चंद दिन पहले चाँद निकला, कुछ बदला- बदला सा ‘ब्लड मून’ शायद चाँद को भी हो गया है इश्क तभी […]
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“कभी-कभी तुम मौन हो जाते हो. लगता है यही मौन हिमालय की पहाड़ियों में होगा, जहाँ अनेक वर्षों तक तपस्वी
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“मैं कांच तू पत्थर है. मैं टूटती, बिखरती, चुभती हूँ. तू टूटता, बिखरता, संवरता है.“ कांच सी एक लड़की-1
kanch si ek ladki – 1 Read Post »
Perfectly imperfect. Aren’t we all? Or is it accurate to say that no one is perfect? Whatever may be the
Develop confidence : practical approach 101 Read Post »