kanch si ek ladki – 12

रिश्ता कुछ उलझा-उलझा सा रहा तुमसे,

प्यार और नफरत के बीच की

महीन रेखा के पार….

हर बार चले जाते थे हम तुम…

कभी स्वीकार नहीं कर पाए तुम,

न प्रेम को न नफ़रत को,

पर दुनिया स्वीकृति चाहती है,

इसलिए हमारा ‘रिश्ता’

ज़माने की नज़र में सवालिया रहा….

उलझा-उलझा सा…..”

कांच सी एक लड़की-12

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